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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  • क्या अनिवासी भारतीय नागरिकों को भारत में आवासीय / वाणिज्यिक संपत्ति अर्जित करने के लिए रिज़र्व बैंक की अनुमति आवश्यक है ?

    नहीं.

  • क्या भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों को अपने आवासीय उपयोग के लिए भारत में अचल संपत्ति खरीदने के लिए रिजर्व बैंक से अनुमति आवश्यक है?

    जी हां. तथापि रिजर्व बैंक ने भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों को चाहे वे भारत के निवासी हों या विदेश के, भारत में उनके वास्तविक आवासीय प्रयोजन के लिए अचल संपत्ति की खरीद को सामान्‍य रुप से अनुमति प्रदान की है. इसलिए, उन्हें रिज़र्व बैंक से अनुमति लेना आवश्यक नहीं है.

  • सामान्य रुप से प्रदत्‍त अनुमति के अंतर्गत भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों द्वारा आवासीय अचल संपत्ति के लिए खरीद का भुगतान किस प्रकार किया जाना चाहिए ?

    खरीद भुगतान या तो सामान्य बैंकिंग चैनलों के माध्यम से विदेशी मुद्रा में आवक प्रेषण से या भारत में बैंकों में रखे गए एनआरई / एफसीएनआर खातों में रखी निधि के माध्‍यम से पूरा किया जाना चाहिए.

  • सामान्य रुप से प्रदत्‍त अनुमति के अंतर्गत भारत में आवासीय अचल संपत्ति की खरीद के लिए भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों द्वारा पूरी की जाने वाली औपचारिकताएं क्या हैं ?

    उन्हें अचल संपत्ति की खरीद या खरीद के अंतिम भुगतान की तारीख से 90 दिनों की अवधि के भीतर मुंबई में रिजर्व बैंक के केंद्रीय कार्यालय के साथ आईपीआई 7 में एक घोषणा पत्र के साथ दस्तावेज, भुगतान की गई राशि के संबंध में लेनदेन और बैंक प्रमाणपत्र की प्रमाणित प्रति के साथ दाखिल करना आवश्यक है.

  • क्या ऐसी संपत्ति बिना रिजर्व बैंक की अनुमति के बेची जा सकती है ?

    जी हां. रिजर्व बैंक ने ऐसी संपत्ति की बिक्री के लिए सामान्य रुप से अनुमति दी है. तथापि जहां संपत्ति भारतीय मूल के किसी अन्य विदेशी नागरिक द्वारा खरीदी जाती है, खरीद राशि के लिए निधि या तो भारत में अंतरित की जानी चाहिए या एनआरई / एफसीएनआर खातों में रखी गई शेष राशि से इसका भुगतान किया जाना चाहिए .

  • क्या ऐसी संपत्ति की बिक्री से प्राप्त आय, यदि और जब भी बेची जाती है, भारत से बाहर अंतरित की जा सकती है ?

    दिनांक 26/05/1993 को या उसके बाद खरीदी गई आवासीय संपत्तियों के संबंध में, रिज़र्व बैंक ऐसी दो संपत्तियों के लिए संपत्ति के अधिग्रहण के लिए विदेशी मुद्रा में अंतरित प्रतिफल राशि तक बिक्री आय के प्रत्यावर्तन के लिए आवेदनों पर विचार करता है. दिनांक 26/05/1993 से पहले खरीदी गई संपत्तियों के संबंध में बिक्री से प्राप्‍त आय की शेष राशि, यदि कोई है या बिक्री से प्राप्त होती है, संपत्ति के मालिक के सामान्य अनिवासी रुपये खाते में जमा की जानी चाहिए.

  • यदि बिक्री के बाद प्राप्‍त आय का प्रत्यावर्तन वांछित है तो क्या कोई शर्त पूरी करने की आवश्यकता है ?

    बिक्री से प्राप्‍त आय के प्रत्यावर्तन के लिए आवेदनों पर विचार किया जाता है बशर्ते कि बिक्री अंतिम खरीद विलेख की तारीख से 3 साल बाद या प्रतिफल राशि की अंतिम किस्त के भुगतान की तारीख से, जो भी बाद में हो.

  • इस प्रकार के प्रत्यावर्तन की प्रक्रिया क्या है ?

    संपत्ति की बिक्री के 90 दिनों के भीतर मुंबई में रिजर्व बैंक के केंद्रीय कार्यालय को बिक्री प्राप्तियों के धनप्रेषण के लिए आवश्यक अनुमति हेतु आवेदन फॉर्म आईपीआई 8 में किया जाना चाहिए.

  • क्या भारतीय मूल के विदेशी नागरिक उपहार स्‍वरुप आवासीय संपत्ति का अधिग्रहण या निपटान कर सकते हैं?

    जी हां. रिज़र्व बैंक ने सामान्यत: भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों को उपहार स्‍वरुप या किसी भारतीय नागरिक या भारतीय मूल के व्यक्ति, चाहे वह भारत का निवासी हो या न हो, से उपहार स्‍वरुप 2 घरों तक की संपत्ति का अधिग्रहण या निपटान करने की अनुमति प्रदान की है बशर्ते कि उपहार कर का भुगतान किया गया हो.

  • क्या भारतीय मूल के विदेशी नागरिक भारत में वाणिज्यिक संपत्ति अर्जित कर सकते हैं ?

    जी हां. रिजर्व बैंक द्वारा दी गई सामान्य रुप से अनुमति के अंतर्गत कृषि भूमि / फार्महाउस / बागान संपत्ति के अलावा अन्य संपत्तियों को भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों द्वारा अधिग्रहित किया जा सकता है, बशर्ते कि खरीद प्रतिफल या तो सामान्य बैंकिंग चैनलों के माध्यम से या निधि से भारत में बैंकों में रखे गए क्रेता के एनआरई/एफसीएनआर खातों से विदेशी मुद्रा में आवक प्रेषण से पूरा किया जाता है तथा संपत्ति की खरीद/खरीद प्रतिफल के अंतिम भुगतान की तारीख से 90 दिनों की अवधि के भीतर आईपीआई 7 के रूप में रिजर्व बैंक के केंद्रीय कार्यालय को घोषणापत्र प्रस्तुत की जाती है.

  • क्या वे ऐसी संपत्तियों का निपटान कर सकते हैं ?

    जी हां.

  • क्या ऐसी संपत्ति की बिक्री से प्राप्त आय भारत से बाहर धनप्रेषित की जा सकती है ?

    जी हां. दिनांक 26/05/1993 को या उसके बाद भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों द्वारा खरीदी गई संपत्तियों के संबंध में मूल निवेश के प्रत्यावर्तन को मूल रूप से विदेश से अंतरित प्रतिफल राशि तक अंतरित करने की अनुमति होगी, बशर्ते कि प्रतिफल राशि की अंतिम किस्त के भुगतान की तारीख से 3 वर्ष की अवधि के बाद, जो भी बाद में हो, संपत्ति बेची गई हो. इस प्रयोजन के लिए फॉर्म आईपीआई 8 में संपत्ति की बिक्री के 90 दिनों के भीतर रिजर्व बैंक के केंद्रीय कार्यालय में आवेदन करना आवश्यक है.

  • यदि तत्काल उपयोग के लिए आवश्यक न हो तो क्या संपत्ति (आवासीय/वाणिज्यिक) किराए पर दी जा सकती है ?

    जी हां. रिजर्व बैंक ने भारत में किसी भी अचल संपत्ति को किराए पर देने की सामान्य रुप से अनुमति प्रदान की है. किराया आय या इस प्रकार की आय के किसी भी निवेश को एनआरओ खाते में जमा किया जाना है.

  • क्या अनिवासी भारतीय आवासीय प्रयोजन के लिए घर / फ्लैट के अधिग्रहण के लिए आवास ऋण उपलब्ध कराने वाले वित्तीय संस्थानों से ऋण प्राप्त कर सकते हैं ?

    रिज़र्व बैंक ने आवास वित्त प्रदान करने वाले कतिपय वित्तीय संस्थानों अर्थात एचडीएफसी, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड, आदि को कुछ शर्तों के अधीन स्व-अधिवास के लिए घर / फ्लैट के अधिग्रहण हेतु अनिवासी भारतीयों को आवास ऋण प्रदान करने के लिए सामान्य रुप से अनुमति प्रदान की है.

  • क्या प्राधिकृत डीलर अनिवासी भारतीयों को आवासीय प्रयोजन से फ्लैट / घर के अधिग्रहण के लिए ऋण प्रदान कर सकता है ?

    अनिवासी भारतीयों को स्वयं रहने के लिए घर / फ्लैट के अधिग्रहण हेतु उनके भारत लौटने पर प्राधिकृत डीलरों को कुछ शर्तों के अधीन ऋण देने की अनुमति प्रदान की गई है. ऋण की चुकौती जो बैंकिंग चैनलों के माध्यम से आवक प्रेषण से, या निवेशक के एनआरई / एफसीएनआर / एनआरओ खातों में रखी गई निधि में से 15 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए.

  • क्या भारतीय कंपनियां अपने एनआरआई स्टाफ को ऋण प्रदान कर सकती हैं ?

    भारतीय रिज़र्व बैंक ने भारतीय फर्मों / कंपनियों को कुछ शर्तों के अधीन विदेश में प्रतिनियुक्त और भारतीय पासपोर्ट धारक अपने कर्मचारियों को आवास ऋण देने की अनुमति प्रदान की है.

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